Molitics Journalist Moves Supreme Court Over Detention, Files Contempt Petition

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मोलिटिक्स के पत्रकार अमान रस्तोगी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. कोर्ट में दायर अपनी अवमानना याचिका में रस्तोगी ने कहा कि उन्हें रविवार और फिर सोमवार को हिरासत में लिया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को “किसी भी तरह से अपने पेशेवर कर्तव्यों का निर्वहन करने से नहीं रोका जाएगा.”

लाइव लॉ की के मुताबिक, याचिका में केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त, नई दिल्ली जिले के डीसीपी और कमला मार्केट थाने के एसएचओ को पक्षकार बनाया गया है. 

याचिका में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है. 

साथ ही, दिल्ली पुलिस आयुक्त से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा गया है कि पत्रकार को हिरासत में लेने का कानूनी आधार क्या था. इसमें हिरासत में शामिल पुलिसकर्मियों के नाम और बेल्ट नंबर, डीडी/जीडी एंट्री, हिरासत या जब्ती का मेमो नहीं बनाए जाने की वजह और यह जानकारी भी मांगी गई है कि क्या मिंटो रोड इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत कोई निषेधाज्ञा लागू थी.

लाइव लॉ के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि रस्तोगी को रविवार को कनॉट प्लेस के पास प्रदर्शन की रिपोर्टिंग करते समय पहली बार हिरासत में लिया गया. उस वक्त उनकी प्रेस आईडी साफ तौर पर दिखाई दे रही थी. 

याचिका के अनुसार, रस्तोगी ने जब पुलिस से आम नागरिकों, जिनमें एक 16 वर्षीय किशोर भी शामिल था, को हिरासत में लिए जाने के बारे में सवाल किया, तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया. आरोप है कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बस में बैठा दिया गया.

इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया था. वीडियो में रस्तोगी बस की खिड़की से अपनी प्रेस आईडी दिखाते नजर आ रहे थे.

रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोमवार को दोपहर करीब 3.30 बजे मिंटो रोड के पास रस्तोगी को दोबारा हिरासत में लिया गया. याचिका में यह भी कहा गया है कि उनकी प्रेस आईडी नाले में फेंक दी गई और दोनों ही दिनों में हिरासत का कोई मेमो तैयार नहीं किया गया.

इससे पहले, न्यूज़लॉन्ड्री और द न्यूज़ मिनट ने अपनी विस्तृत में बताया था कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में एक नियम सबसे ऊपर दिखाई दिया. पत्रकारों के पास किसी भी तरह की आईडी हो, उन्हें हिरासत में ले लो. रिपोर्ट में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद पत्रकारों को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, इसका ब्योरा दिया गया है.

इसके अलावा, नेटवर्क ऑफ विमेन इन मीडिया, इंडिया (एनडब्ल्यूएमआई) ने भी दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रही महिला पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और मनमाने ढंग से हिरासत में लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है.

इसी तरह फ्री स्पीच कलेक्टिव ने भी पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने के मामले में अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

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